अब तो आदत से मजबूर हें

हेलो, बुड्डो का और लडको का लंड पकड़ के हाथ सेपानी निकालना ये सब अब मेरी आदत बन गयी थी. हमारी शादी हुए अभी २ साल ही हुए थे, कि सेक्स ने चुदाई ने हमें घेर लिया था. एक दिन पति बोला, कि कोई जवान तुझे ठोकेगा? तो मैं हंस कर बोली – अगर मैं उसके साथ भाग जाऊ तो? फिर हम दोनों ही हंसने लगे. पति बोले – एक काम कर, किसी बुद्दे को पकड़ ले. मैं बोली – पकड़ने के लिए तो मैं तैयार हु, लेकिन पकडू किसको? इसी तरह हम रोज़ गन्दी बातें करते और एक दिन हम पिक्चर देखने गये थे. अभी पिक्चर शुरू होने में टाइम था. हॉल खाली था और हम कोका – कोला पी रहे थे. एक ६५ साल के आसपास का आदमी कभी मुझे और कभी पिक्चर के पोस्टर को देख रहा था. वो धोती में था. उसे पिक्चर जाना नहीं था, पर ऐसे ही देख रहा था शायद. छोटा – मोटा बिज़नसमेन लग रहा था देखने में. मेरे पति भी उसको देख रहे थे. वो अचानक मुझ से बोले – इसको पकड़ेगी? मैं चुप रही. इतने में, मेरे पति ने उन्हें आवाज़ दी और वो बोले – अंकल पिक्चर देखना है. मेरे पास पास एक्स्ट्रा है. वो ना ना करने लगे.

पति बोले – पैसे देने की जरूरत नहीं है. आखिर में वो तैयार हो गये. हम तीनो अन्दर अगये और मैं बीच में अंकल साइड में और पति दूसरी साइड में बैठ गए. पति ने मुझे बोला, पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी. अंकल भी मुझे टच नहीं कर रहे थे. मैंने एक दो बार आहिस्ते से धक्का मारा था. इंटरवल में मेरे पति बे बोला – पकड़ो ना उसका लंड. मुठ मारो ना उस की. निकालो उसके लंड को बाहर. आखिर इंटरवल के बाद, मैंने उन्हें आहिस्ते – आहिस्ते छुना शुरू किया और फिर मैंने उनकी जांघो पर हाथ रख दिया और धोती के ऊपर आहिस्ते – आहिस्ते हाथ घुमाने लगी. अब उन्होंने एक ऊँगली मेरे बदन को टच की और मैं धीरे – धीरे उनके लंड की तरफ हाथ बढ़ाने लगी. और एक – दो बार लंड को टच भी कर दिया. तो अब उन्होंने भी अपनी दो उंगलिया मेरे बदन को टच कर दी. आखिर में, मैंने हिम्मत करके उनकी धोती के ऊपर से अपना हाथ उनके लंड पर रख दिया. उनका लंड टाइट होने लगा था. मैंने उनके लंड को पकड़ लिया और उसको दबाने लगी. अब वो मेरे बूब्स को उंगलियों से टच करने लगे थे और मैं उनकी तरफ खिसक गयी और उनकी धोती में हाथ डाल कर उनके लंड को बाहर निकालने लगी. फिर मैंने खीच कर उनके लंड को उनकी धोती से बाहर निकाल लिया.

तो उन्होंने भी अपने पंजो से मेरा बूब्स दबा दिया. तो अपने दुसरे हाथ से उनके हाथ को पकड़ लिया और अपने ब्लाउज में डाल दिया. अब वो मेरे दोनों बूब्स को धीरे – धीरे दबाने लगे. मैंने अब उनका मुठ मारना शुरू कर दिया था. फिर मैंने उनका दूसरा हाथ पकड़ा और साड़ी में डाला. तो वो साड़ी को ऊपर उठाने लगे. तो मैंने अपने हाथ से ही साड़ी को ऊपर उठा दिया. मेरी गोरी – गोरी जांघे पिक्चर की लाइट में चमकने लगी. मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने अंडरवियर में डाल दिया और अब मैं ऊँगली डालने लगी. एक हाथ से बूब्स को दबाने लगी. मैं अपना हाथ बदल – बदल कर उनके लंड का मुठ्ठी मार रही थी. मैंने पति नींद का बहाना करके सब देख रहे थे. बुड्डा बार – बार मेरा हाथ लैंड पर से निकालता. मैंने फिर से पकड़ लेती थी.. अब ऊओं ओओओं अओअऊअ अहहहः करने लगा था वो.. और अपनी गांड को भी हिलाने लगा था… मैं समझ गयी, कि अब इसका काम होने वाला है. उसका लंड उसका माल निकालने वाला था. अब उसने अपनी दो उंगलिया मेरी चूत में डाल दी और उसको हिलाने लगा. वो मेरे बूब्स को जोर – जोर से दबा रहा था हाहाह अहः अहः अहहाह अहः फ्क्फक्फ्कफ्क्फ़ करने लगा था. मैंने स्पीड तेज कर दी और उन्होंने पिचकारी मारी और मैंने सारा माल अपने ऊपर हथेली में ले लिया और माल से ही उसके लंड को धोने लगी.

बहुत माल निकल रहा था और पच – पच – पच – पच की आवाज़े आने लगी थी. वो मेरा हाथ रोकने लगे. तब भी मैं उनका मुठ मारे जा रही थी. उन्होंने मेरा हाथ हटा दिया और मैं आह्सिते से उनको बोला – चाचा आप खुश तो है ना? मैंने अपने रुमाल से अपना हाथ साफ़ किया और सारी पिक्चर में हम बहुत खुश थे. ये हमारा पहला ऑपरेशन था. हम रात भर उस बुद्दे के बारे में ही बातें करते रहे. जिन्दगी में पहली उसे एसा मज़ा मिला होगा. अब हमने प्लान बनाया, कि किसी लड़के को फसाते है. हमने सोचा, की नून का शो लेंगे इस बार.. उस में कॉलेज के लड़के आते है. ३ बार जाने के बाद, हमे एक १८ – १९ साल का लड़का दिखा. वो हाफ पेंट में था और पोस्टर को देख रहा था. मेरे पति ने पूछा, एक्स्ट्रा चाहिए क्या? वो ना ना करने लगा. फिर फाइनली तैयार हो गया. अब मैं भी इस काम में एक्सपर्ट हो गयी थी. मैं आहिस्ते – आहिस्ते लोगो को फ़साने लगी. गरमी बहुत है.. ऐसा दिखा कर साड़ी जांघो के ऊपर उठाई. वो मेरे चमकती हुई जांघो को देख रहा था.. कभी – कभी मैं अन्दर हाथ डाल कर खुजली करने के बहाने से उसे कोहनी मार देती.

एक दो बार उसकी जांघो पर हाथ भी रखा. इंटरवल हुआ, पति गये तो मैं उसे बोला.. कितनी गरमी है ना.. अच्छा है तुमने हलग पेंट पहना हुआ है. वो चुप था. मैं बोली – पिक्चर अच्छी है ना? वो तब भी चुप था. मैंने उसको देखा और बोली – क्या हुआ? डरो मत और हाथ से उसकी जांघे दबाने लगी. इतने में अँधेरा हो गया और मेरे पति भी आ गये. वो सोने की एक्टिंग करने लगे. मैं ने उसका हाथ पकड़ कर अपने ब्लाउज में डाल दिया और फिर मैंने उसकी चड्डी में हाथ डाला और आहिस्ते – आहिस्ते अन्दर देने लगी. फिर मैंने एकदम से उसके लंड को पकड़ लिया. लंड टाइट था और मैंने उसके लंड को दबाना शुरू कर दिया. फिर मैंने उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी ब्लाउज में डाल लिया और उसके काम में धीरे से बोला – दबाओ ना.. डरो मत.. दबाओ तुम मस्त होकर.. उसकी थोड़ी सी हिम्मत बड़ी और वो अब मेरे बूब्स को दबाने लगा था. मैंने उसकी चड्डी के सारे बटन खोल दिए और उसका मुठ मारने लगी और उसके कान में बोलने लगी.. बहुत अच्छा है रे तेरा लंड तो.. चोदेगा मुझे? वो चुप चाप था. मैंने मेरी साड़ी ऊपर उठाई और उसे बोली – मेरे पति सो रहे है. तू मेरी चूत में अपनी ऊँगली डाल और मैंने उसके एक हाथ को पकड़ लिया और अपने अंडरवियर में डाल दिया. वो मेरी चूत को सहलाने लगा.

और मैं जोर – जोर से उसका मुठ मारने लगी. मैं हहहः अहहाह हूऊ हूऊ होऊ उफुफुफुफ़ फुफुफु करने लगी. मैं हाथ बदल – बदल कर धका – धका – धका – धका मुठ मारने लगी. अब वो भी श्शश्ह्श्श औऔऔऔ औऔऔउ करने लगा था. वो बोलने लगा, प्लीज और फ़ास्ट करो… और फ़ास्ट… मैं समझ गयी, कि अब इसका निकलने वाला है. फिर मैंने उसको अपने सामने खड़ा कर दिया और उसका लंड मुह में ले लिया. पीछे कोई देख नहीं सकता था. क्योंकी हम लोगो ने लास्ट की सीट ली हुई थी. सिर्फ मेरे पति थे और वो सोने की एक्टिंग कर रहे थे. मैं दबा – दबा कर उसका नमकीन लंड चूसने लगी. अब वो भी ढुकने लगा मेरे मुह से लंड निकाल कर मैंने उस से आहिस्ता से पूछा, कि अच्छा लग रहा है क्या? वो हाँ – हाँ करने लगा और मैंने उस से फिर से उसका मुह अपने मुह में रख लिया और मुझे हाथ लगाने लगा. फिर उस ने एक झटके से जोरदार पिचकारी मार दी. फिर मैंने उसका सारा का सारा माल पी लिया. मैं बहुत खुश थी और वो अब अपना लंड खीचने लगा. लेकिन तब भी मैं उसके लंड को चूस रही थी. और मैंने उसके लंड को चुसना नहीं छोड़ा.. तो तरह हमने एक नया मज़ा लुटा और रात भर उसी के बारे में बातें करते रहे और मेरे पति ने मुझे मस्त चोदा.

इसी तरह हम कभी – कभी मज़ा लुटने लगे और आया नवरात्री का दिन. मेरे पति ने मुझे बहुत ही सेक्सी सी घाघरा – चोली मुझे गिफ्ट में दी. उस ड्रेस में मुझे देखा बहुत से लौड़े खड़े हो गये थे और मेरी हर एक लौड़े को मज़ा देने की इच्छा थी. मैं जब भी गरभा करती, तो सब मुझे ही देखते रह जाते. नवरात्रि ख़तम होने से पहले की बात है. मेरे पति बोले, अब सिर्फ दो दिन ही बचे है.. किसी को पटा ना. मैं तैयार थी. आखिर हमने एक धोती वाले चाचा को देखा. जो मुझे रोजाना ही घूरता था. वो करीब ७० साल का होगा. मैं उस दिन गरभा होने के बाद, अपने पति को बोली – मैं थक गयी हु और अब तुम ही खेलो. मैं चाचा के सामने जाकर खड़ी हो गयी थी. भीड़ बहुत ज्यादा बड गयी थी और मैं धीरे – धीरे सबको आगे करते हुए चाचा की तरफ पीछे बड़ने लगी थी. अब मैं चाचा के बिलकुल पास में ही थी और चाचा ने भी हिम्मत करके मुझ को टच करना शुरू कर दिया था. मैं चुप थी और उसका लंड मेरी गांड पर टच होने लगा था. इतने में मेरे पति ने मुझको आवाज़ दी.. आगे आओ ना… पीछे क्यों खड़ी हो? मैं जोर से बोली – तुम खेलो.. मैं देख रही हु.. मैं यहीं ठीक हु.. अब चाचा समझ गये, कि मैं एकदम तैयार हु और उनको अच्छा लगा.

उनकी हिम्मत अब बड़ने लगी थी और वो मेरे चुतड पर अपने लंड को रगड़ने लगे. भीड़ बहुत बड गयी थी. हम दोनों एकदम पीछे हो गये थे. अब वो क्या करता है, किसी को दिखाई नहीं दे रहा था. वो मेरी गांड पर अपने लंड को धीरे – धीरे घिस रहा था. मैंने पति गरभा – गरभा करते हुए मुझे बुलाने आ गये और बोले – चलना है क्या? मैं चिल्ला कर बोली, तुम खेलो ना. थोड़ी देर बाद चलेंगे. पीछे वाला चाचा अब सब कुछ समझ चूका था. वो समझ रहा था, कि मुझे उसका लंड को मेरे चुतड पर रगड़ना अच्छा लगा रहा था. अब वो घाघरे के ऊपर से हाथ फेर रहा था और अपना लंड रगड़ रहा था. मैं उसका पूरी तरह से साथ दे रही थी. वो समझ गया और मेरा घाघरा ऊपर उठाने लगा. मैं चुप रही. उसने मेरा घाघरा ऊपर उठाया और मैंने उस जान बुझ कर अंडरवियर नहीं पहनी हुई थी. वो मेरी गांड पर अपना हाथ घुमा रहा था और गांड के नीचे से हाथ डालके चूत में ऊँगली डालने लगा. मैं अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और अब वो लंड गांड और चूत में डालने की कोशिश करने लगा था. मैं भीड़ होने बावजूद थोड़ी झुकी और तब भी लंड चूत में जाना पॉसिबल नहीं था. तब वो गांड में धोकने लगा. मैं भी अपनी गांड को फुलाने लगी थी.

वो धक्के मारने लगा था और मैं थोड़ी – थोड़ी हिलाती और गांड में लंड लेने की कोशिश कर रही थी. अब चाचा मुझे दबा कर गांड में लंड डालने की कोशिश करने लगा था. ऐसे लगा, जैसे थोड़ा सा लंड गांड में गया. इतने में उसने पिचकारी मारी और मैंने पीछे हाथ करके घाघरा पकड़ा. इतने में उसने दूसरी पिचकारी निकाली. मेरी गांड पूरी चिकनाहट से भर गयी. इतने में उसने चिर्र्रर्र्र चिर्र्र्रर चिर्र्रर्र्र करके अपने माल से मेरी गांड को भर दिया. उसका माल बहुत सारा था और बहुत गरम था. मेरे मुह से अहहाह अहहाह अहहहा ऊओहोहोह करके सिस्कारिया निकल गयी. मैंने पीछे से हाथ करके उसके लंड को अपनी मुठ्ठी में बंद कर दिया और बोली – चाचा खुश हो ना आप? वो देखता रहा और मैं वहां से भाग गयी. घर आकर हम रात भर उसके बारे में ही बातें करते रहे. मेरा पति बोले, तूने बहुत अच्छा किया, जो एक सत्तर साल के बुद्दे के साथ मज़ा किया. वरना इतनी उम्र का आदमी हमने मिलने वाला नहीं था. तो दोस्तों, ये थी मेरे और मेरे पति की फेंटेसी की कहानी. हम अभी भी ये एक्सपेरिमेंट करते है और मज़ा लेते है. प्लीज इस स्टोरी को पढ़ने के बाद, हम लोगो को अपने कमेंट जरुर बताना और कमेंट जरुर देना…