बूढों ने मिलकर मेरी चूत पे अपनी जवानी निकाली

आज मैं अपना एक और ताज़ा-ताज़ा, जबरदस्त मेरे साथ हुआ कांड सबके सामने लेकर आया हूं। मैंने पिछली होली पर भी चुदाई का नज़ारा लिया था यहाँ तक कि उस दिन एक रण्डी के सामने मैंने अपनी गाण्ड मरवाई और फिर उसकी चूत मारी। वैसे मुझे लड़की चोदने में इतनी दिलचस्पी नहीं है।

आज फिर से मैंने इतिहास दोहरा दिया है, यह होली भी रंगों के साथ लौडों से रंगीन की। होली खेलने के लिए मैं डिफेंस कालोनी चला गया। रंग से लथपथ था, टीशर्ट मम्मों से चिपकी पड़ी थी, मैंने बनियान जानबूझ कर नहीं पहनी थी, पजामा भी सफ़ेद था काले रंग की पैंटी मैंने स्पेशल खरीदी लड़कियों वाली, दुनिया रंग से रंग हुई पड़ी थी मगर कुछ दिनों से मेरी गाण्ड सूखी थी, मेरी गाण्ड में खुजली मचने लगी थी, ग्यारह दिनों से मुझे लौड़ा हासिल नहीं हो पाया था। फाइनल पेपरों की वजह से मेरा इन्टरनेट भी बंद था।

होली के कारण मुझे जाने का बहाना मिला, मैंने भी चाहने वालों को फ़ोन लगाए। सभी होली खेलने के लिए गए हुए थे। डिफेंस कालोनी के सामने आनन्द कालोनी में मेरे दो आशिक रहते थे, प्रवासी थे बिहार से काम करने आये थे, उनके शानदार से काले से लौड़ों का दीवाना होकर उनको ले चुका था, वहां भी ताला लटका था।

मेरे अरमान टूट गए, वो अब वहाँ से जा चुके थे।

मैंने बाईक रोक कर इधर-उधर नज़रें दौड़ाई मगर लड़के तो लड़कियों के पीछे पड़े थे। हर लड़का अकेली लड़की ढूंढ उसके मम्मों को दबाने-सहलाने की ताक में था रंग लगाने के बहाने !

मेरी नज़र डिफेंस कालोनी में पार्क के कोने पर इनोवा कार खड़ी दिखी, वहाँ तीन बंदे खड़े थे, उनके हाथों में शराब के पैग थे, वो काफी उम्र के लग रहे थे। सफ़ेद बाल भी थे थोड़े थोड़े, सभी पचास के आसपास लग रहे थे।

मैंने दो गुब्बारे अपने मम्मों पर फोड़ दिए क्यूंकि मेरी टीशर्ट सूख गई थी। गीले होते ही फिर चिपक गई, एक गुब्बारा गाण्ड पर फोड़ा।

रंग लेकर बाईक लगा उनकी तरफ बढ़ने लगा।

होली मुबारक ! होली मुबारक ! मैंने उनके ऊपर रंग फेंका और गुब्बारा निकाल मारा।

“बुरा न मानो होली है ! कहा।

उनको गुस्सा आ गया, यही मैं चाहता था।

साले यह क्या किया? तुझे हम ही मिले? पकड़ो साले को ! पकड़ो इसको !

एक ने मुझे पकड़ लिया।

मैंने कहा- होली में बुरा नहीं मानते हैं।

अपनी उम्र के लोगों से खेलते हैं ! उसने चांटा खींचा।

मैंने नीचे से उसके लौड़े को पकड़ मसल दिया, उसका हाथ वहीं रुक गया- यह क्या कर रहा है?

जो आप देख रहे हो ! बाकी दोनों ने भी नीचे देखा- साले तू पागल है क्या ?

दीवाना हूँ पागल नहीं !

कैसा दीवाना?

मर्दों का दीवाना !

साले मज़ाक करता है? साले भाग़ जा यहाँ से !

मैंने प्यार से उसके लौड़े को दुबारा पुचकारा, हाथ से सहलाया।

पैंट के अंदर उसके लौड़े में भी हलचल हुई।

दूसरा हाथ मैंने दूसरे बंदे के लौड़े पर टिका दिया।

क्या चाहता है? तीसरा बोला।

“आपकी दीवानगी !” मैंने कहा।

हमारी सयाने-बयानों की इज्ज़त नीलाम करवाएगा?

मैंने उसकी जिप खोल दी, हाथ घुसा दिया।

एक ने मेरे पजामे में अपना हाथ घुसा मेरे चूतड नापे- बहुत मस्त है भाई इसकी गाण्ड ! यहाँ नहीं, चल हमारे साथ ! लेकिन जाने से पहले एक बात सुन ले, हमारे बहुत बड़े ज़बरदस्त हैं बाद में बिना डाले छोडेंगे नहीं ! चाहे चिल्लाए भी ! अभी भी मौका है, जाना है तो जा !

चलो तो !

मुझे लेकर वे एक किसी के घर गए। वहाँ से एक बंदे ने गेट खोला- सभी मिले।

होली मुबारक !

यह कौन है?

यह गाण्डू है, कहता है कि चुदना है।

तो ले चलो !

चारों ने पहले मुझे कहा- अपने पूरे कपड़े उतार !

सभी मेरे चूतड़ों को दबाने लगे। मेरे छेद में ऊँगली करते चारों ने अपने लौड़े निकाल लिए।

एक बोला- साले तेरे मम्मे लड़की जैसे क्यूँ हैं?

क्यूंकि मैं अंदर लड़की हूँ !

उनके लौड़े काफी बड़े बड़े थे लेकिन मैं भी कई लौड़ों से खेल चुका था, मुझे भी याद नहीं होगा कितनी दफा मेरी गाण्ड में लौड़ा घुसा है। मैं बीच में बैठ चारों के बारी बारी चूसने लगा।

एक ने लौड़ा मेरे छेद पर टिकाया और झटका दिया, उसका घुसने लगा, पूरा घुसा दिया, तकलीफ हुई लेकिन मैं सह गया।

वो सभी देखते रह गए।

और फिर क्या था, एक मैंने मुँह में लिया हुआ था, दूसरे का गाण्ड में, एक-एक करके चारों मेरे ऊपर चढ़ने लगे, कोई मेरे मम्मे चूसने लगता !

हाय ! मैं तो मजे से तरो-ताजा हो गया, एक साथ चार मर्द मुझे चोद रहे थे, मेरी प्यास बुझने लगी और आखिर चारों चित्त हो गए।